सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-शूरातन का अंग 24 जब दादू मरबा गहै, तब लोगों की क्या लाज ? सती राम साचा कहै, सब तज पति सौं काज ॥ 4 ॥ शूरवीर कायर दादू हम काइर कड़बा कर रहे, शूर निराला होइ। निकस खड़ा मैदान में, ता सम और न कोइ ॥ 5 ॥ शूर सती साधु निर्णय मड़ा न जीवै तो संग जलै, जीवै तो घर आण। जीवन मरणा राम सौं, सोई सती करि जाण ॥ 6 ॥ जन्म लगै व्यभिचारणी, नख शिख भरी कलंक। पलक एक सन्मुख जली, दादू धोये अंक ॥ 7 ॥ स्वांग सती का पहर कर, करै कुटुम्ब का सोच। बाहर शूरा देखिये, दादू भीतर पोच ॥ 8 ॥ दादू सती तो सिरजनहार सौं, जलै विरह की झाल। ना वह मरै न जलि बुझै, ऐसे संगि दयाल ॥ 9 ॥ जे मुझ होते लाख सिर, तो लाखों देती वारि। सह मुझ दिया एक सिर, सोई सौंपै नारि ॥ 10 ॥ सती जल कोइला भई, मुये मड़े की लार। यों जे जलती राम सौं, साचे संग भर्तार ॥ 11 ॥ मुये मड़े सौं हेत क्या, जे जीव की जाणै नांहि। हेत हरि सौं कीजिये, जे अन्तरजामी मांहि ॥ 12 ॥ शूरवीर कायर शूरा चढ़ संग्राम को, पाछा पग क्यों देहि ? साहिब लाजै भाजतां, धृग् जीवन दादू तेहि ॥ 13 ॥ सेवक शूरा राम का, सोई कहेगा राम। दादू सूर सन्मुख रहै, नहिं कायर का काम ॥ 14 ॥
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