भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-शूरातन का अंग 24 कायर काम न आवही, यहु शूरे का खेत। तन मन सौंपै राम को, दादू शीश सहेत ॥ 15 ॥ जब लग लालच जीव का, तब लग निर्भय हुआ न जाइ। काया माया मन तजै, तब चौड़े रहै बजाइ ॥ 16 ॥ दादू चौड़े में आनन्द है, नाम धज्या रणजीत। साहिब अपना कर लिया, अन्तरगत की प्रीति ॥ 17 ॥ दादू जे तुझ काम करीम सौं, तो चौहट चढ़ कर नाच। झूठा है सो जाइगा, निहचै रहसी साच ॥ 18 ॥ जीवत मृतक राम कहेगा एक को, जे जीवित-मृतक होइ। दादू ढूंढे पाइये, कोटि मध्ये कोइ ॥ 19 ॥ शूर सती साध निर्णय शूरा पूरा संत जन, सांई को सेवै। दादू साहिब कारणै, सिर अपना देवै ॥ 20 ॥ शूरा जूझै खेत में, सांई सन्मुख आइ। शूरे को सांई मिले, तब दादू काल न खाइ ॥ 21 ॥ मरबे ऊपरि एक पग, कर्ता करै सो होहि। दादू साहिब कारणै, तालाबेली मोहि ॥ 22 ॥ हरि भरोसा दादू अंग न खैंचिये, कहि समझाऊँ तोहि। मोहि भरोसा राम का, बंका बाल न होहि ॥ 23 ॥ बहुत गया थोड़ा रह्या, अब जीव सोच निवार। दादू मरणा मांड रहु, साहिब के दरबार ॥ 24 ॥ शूरवीर कायर जीवों का संशय पड़या, को काको तारै। दादू सोई शूरमा, जे आप उबारै ॥ 25 ॥

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