भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-शूरातन का अंग 24

राखणहारा राम है, शिर ऊपर मेरे। दादू केते पच गये, बैरी बहुतेरे ॥ 72 ॥ शूरातन विनती दादू बल तुम्हारे बापजी, गिनत न राणा राव। मीर मलिक प्रधान पति, तुम बिन सब ही बाव ॥ 73 ॥ दादू राखी राम पर, अपणी आप संवाह। दूजा को देखूं नहीं, ज्यों जाणें त्यों निर्वाह ॥ 74 ॥ तुम बिन मेरे को नहीं, हमको राखणहार। जे तूं राखै सांइयां, तो कोइ न सकै मार ॥ 75 ॥ सब जग छाड़ै हाथ तैं, तो तुम जनि छाड़हु राम। नहिं कुछ कारज जगत सौं, तुमहीं सेती काम ॥ 76 ॥ शूरातन दादू जाते जीव तैं तो डरूं, जे जीव मेरा होइ। जिन यहु जीव उपाइया, सार करेगा सोइ ॥ 77 ॥ दादू जिन को सांई पाधरा, तिन बंका नांही कोइ। सब जग रूठा क्या करै, राखणहारा सोइ ॥ 78 ॥ दादू साचा साहिब शिर ऊपरै, तती न लागै बाव। चरण कमल की छाया रहै, किया बहुत पसाव ॥ 79 ॥ विनती दादू कहै-जे तूं राखै सांइयां, तो मार सकै ना कोइ। बाल न बांका कर सकै, जे जग बैरी होइ ॥ 80 ॥ दादू राखणहारा राखै, तिसे कौन मारै। उसे कौन डुबोवे, जिसे सांई तारै ॥ बाकी कौन बिगारै, जाकी आप सुधारै। कहै दादू सो कबहूँ न हारै, जे जन सांई संभारै ॥ 81 ॥

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