सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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काल का अंग www.dadooram.org अथ काल का अंग २५ मंगलाचरण दादू नमो नमो निरंजनं, नमस्कार गुरुदेवतः । वन्दनं सर्व साधवा, प्रणामं पारंगत: ।। 1 ।। काल न सूझै कंध पर, मन चितवै बहु आश । दादू जीव जाणै नहीं, कठिन काल की पाश ॥ 2 ॥ दादू काल हमारे कंध चढ, सदा बजावै तूर । कालहरण कर्त्ता पुरुष, क्यों न सँभाले शूर ॥ 3 ॥ जहाँ जहाँ दादू पग धरै, तहाँ काल का फंध । सर ऊपर सांधे खड़ा, अजहुँ न चेते अंध ॥ 4 ॥
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