भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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पृष्ठ 259

श्री दादूवाणी-सजीवन का अंग 26 जीवन मरण जीवित मिले सो जीवते, मूये मिल मर जाइ । दादू दोन्यों देखकर, जहाँ जानैं तहँ लाइ ॥ 16 ॥ सजीवन दादू साधन सब किया, जब उनमन लागा मन । दादू सुस्थिर आत्मा, यों जुग जुग जीवैं जन ॥ 17 ॥ रहते सेती लाग रहु, तो अजरावर होइ । दादू देख विचार कर, जुदा न जीवै कोइ ॥ 18 ॥ जेती करणी काल की, तेती परिहर प्राण । दादू आतमराम सौं, जे तूं खरा सुजाण ॥ 19 ॥ विष अमृत घट में बसै, विरला जानै कोइ । जिन विष खाया ते मुये, अमर अमी सौं होइ ॥ 20 ॥ दादू सब ही मर रहे, जीवै नांही कोइ । सोई कहिये जीवता, जे कलि अजरावर होइ ॥ 21 ॥ देह रहै संसार में, जीव राम के पास । दादू कुछ व्यापै नहीं, काल झाल दुख त्रास ॥ 22 ॥ काया की संगति तजै, बैठा हरि पद मांहि । दादू निर्भय ह्वै रहै, कोई गुण व्यापै नांहि ॥ 23 ॥ दादू तज संसार सब, रहे निराला होइ । अविनाशी के आसरे, काल न लागे कोइ ॥ 24 ॥ जागहु लागहु राम सौं, रैन बिहानी जाइ । सुमिर सनेही आपणा, दादू काल न खाइ ॥ 25 ॥ दादू जागहु लागहु राम सौं, छाड़हु विषय विकार । जीवहु पीवहु राम रस, आतम साधन सार ॥ 26 ॥ मरै तो पावै पीव को, जीवत बंचै काल । दादू निर्भय नाम ले, दोनों हाथ दयाल ॥ 27 ॥

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