भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-सजीवन का अंग 26 दादू मरणे को चला, सजीवन के साथ । दादू लाहा मूल सौं, दोनों आये हाथ ॥ 28 ॥ करुणा दादू जाता देखिये, लाहा मूल गँवाइ । साहिब की गति अगम है, सो कुछ लखी न जाइ ॥ 29 ॥ सजीवन साहिब मिलै तो जीविये, नहीं तो जीवै नांहि । भावै अनंत उपाय कर, दादू मूवों मांहि ॥ 30 ॥ सजीविन साधै नहीं, तातैं मर मर जाइ । दादू पीवै राम रस, सुख में रहै समाइ ॥ 31 ॥ दिन दिन लहुड़े होंहि सब, कहैं मोटा होता जाइ । दादू दिन दिन ते बढ़ें, जे रहैं राम ल्यौ लाइ ॥ 32 ॥ न जाणूं हाँजी, चुप गह, मेट अग्नि की झाल । सदा सजीवन सुमिरिये, दादू बंचै काल ॥ 33 ॥ जीवन मुक्ति दादू जीवित छूटै देह गुण, जीवित मुक्ता होइ । जीवित काटै कर्म सब, मुक्ति कहावै सोइ ॥ 34 ॥ दादू जीवित ही दुस्तर तिरे, जीवित लंघे पार । जीवित पाया जगद्गुरु, दादू ज्ञान विचार ॥ 35 ॥ जीवित जगपति को मिलै, जीवित आत्मराम । जीवित दर्शन देखिये, दादू मन विश्राम ॥ 36 ॥ जीवित पाया प्रेम रस, जीवित पिया अघाइ । जीवित पाया स्वाद सुख, दादू रहे समाइ ॥ 37 ॥ जीवित भागे भ्रम सब, छूटे कर्म अनेक। जीवित मुक्त सद्गति भये, दादू दर्शन एक ॥ 38 ॥

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