सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-सजीवन का अंग 26 जीवित मेला ना भया, जीवित परस न होइ। जीवित जगपति ना मिले, दादू बूड़े सोइ ॥ 39 ॥ जीवित दुस्तर ना तिरे, जीवित न लंघे पार। जीवित निर्भय ना भये, दादू ते संसार ॥ 40 ॥ जीवित प्रकट ना भया, जीवित परिचय नांहि। जीवित न पाया पीव को, बूड़े भवजल मांहि ॥ 41 ॥ जीवित पद पाया नहीं, जीवित मिले न जाइ। जीवित जे छूटे नहीं, दादू गये विलाइ ॥ 42 ॥ दादू छूटे जीवतां, मूवाँ छूटे नांहि। मूवाँ पीछे छूटिये, तो सब आये उस मांहि ॥ 43 ॥ मूवाँ पीछे मुक्ति बतावैं, मूवाँ पीछे मेला। मूवाँ पीछे अमर अभय पद, दादू भूले गहिला ॥ 44 ॥ मूवाँ पीछे वैकुंठ वासा, मूवाँ स्वर्ग पठावैं। मूवाँ पीछे मुक्ति बतावैं, दादू जग बोरावैं ॥ 45 ॥ मूवाँ पीछे पद पहुँचावैं, मूवाँ पीछे तारैं। मूवाँ पीछे सद्गति होवै, दादू जीवित मारैं ॥ 46 ॥ मूवाँ पीछे भक्ति बतावैं, मूवाँ पीछे सेवा। मूवाँ पीछे संयम राखैं, दादू दोजख देवा ॥ 47 ॥ सजीवन दादू धरती क्या साधन किया, अंबर कौन अभ्यास ? रवि शशि किस आरंभ तैं ? अमर भये निज दास ॥ 48 ॥ साहिब मारे ते मुये, कोई जीवै नांहि। साहिब राखे ते रहे, दादू निज घर मांहि ॥ 49 ॥ जे जन राखे राम जी, अपने अंग लगाइ। दादू कुछ व्यापै नहीं, जे कोटि काल झख जाइ ॥ 50 ॥
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