भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-गुरुदेव का अंग 1 दादू काढै काल मुखि, अंधे लोचन देइ। दादू ऐसा गुरु मिल्या, जीव ब्रह्म कर लेइ ॥ 13 ॥ दादू काढै काल मुखि, श्रवणहुँ सबद सुनाइ। दादू ऐसा गुरु मिल्या, मृतक लिये जिलाइ ॥ 14 ॥ दादू काढै काल मुखि, गूंगे लिये बुलाइ। दादू ऐसा गुरु मिल्या, सुख में रहे समाइ ॥ 15 ॥ दादू काढै काल मुख, मिहर दया करि आइ। दादू ऐसा गुरु मिल्या, महिमा कही न जाइ ॥ 16 ॥ सतगुरु काढै केस गहि, डूबत इहि संसार। दादू नाव चढ़ाइ करि, कीये पैली पार ॥ 17 ॥ भौ सागर में डूबतां, सतगुरु काढै आय। दादू खेवट गुरु मिल्या, लीये नाव चढ़ाइ ॥ 18 ॥ दादू उस गुरुदेव की, मैं बलिहारी जाऊँ। जहाँ आसण अमर अलेख था, ले राखे उस ठाऊँ ॥ 19 ॥ ज्ञानोत्पत्ति आत्म मांहै ऊपजै, दादू पंगुल ज्ञान। कृतम् जाइ उलंधि करि, जहां निरंजन थान ॥ 20 ॥ आत्म बोध बँझ का बेटा, गुरु मुखि उपजै आइ। दादू पंगुल पंच बिन, जहाँ राम तहँ जाइ ॥ 21 ॥ गुरु शब्द साचा सहजैं ले मिलै, शब्द गुरु का ज्ञान। दादू हमको ले चल्या, जहाँ प्रीतम का स्थान ॥ 22 ॥ दादू शब्द विचार करि, लागि रहे मन लाइ। ज्ञान गहै गुरुदेव का, दादू सहज समाइ ॥ 23 ॥

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