भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-दया निर्वैरता का अंग 29 दादू मंदिर काँच का, मर्कट सुनहाँ जाइ । दादू एक अनेक है, आप आपको खाइ ॥ 17 ॥ आत्म भाई जीव सब, एक पेट परिवार । दादू मूल विचारिये, तो दूजा कौन गँवार ॥ 18 ॥ दादू सूखा सहजैं कीजिये, नीला भानै नांहि । काहे को दुख दीजिये, साहिब है सब मांहि ॥ 19 ॥ दया निर्वैरता घट घट के उनहार सब, प्राण परस है जाइ । दादू एक अनेक है, बरतैं नाना भाइ ॥ 20 ॥ आये एकंकार सब, साँई दिये पठाइ । दादू न्यारे नांम धर, भिन्न भिन्न है जाइ ॥ 21 ॥ आये एकंकार सब, साँई दिये पठाइ । आदि अंत सब एक है, दादू सहज समाइ ॥ 22 ॥ आतम देव आराजिये, विरोधिये नहिं कोइ । आराधे सुख पाइये, विरोधे दुःख होइ ॥ 23 ॥ ज्यों आपै देखे आपको, यों जे दूसर होइ । तो दादू दूसर नहीं, दुःख न पावै कोइ ॥ 24 ॥ दादू सम कर देखिये, कुंजर कीट समान । दादू दुविधा दूर कर, तज आपा अभिमान ॥ 25 ॥ अदया हिंसा दादू अर्श खुदाय का, अजरावर का थान । दादू सो क्यों ढाहिये, साहिब का नीशान ॥ 26 ॥ दादू आप चिणावै देहुरा, तिसका करहि जतन । प्रत्यक्ष परमेश्वर किया, सो भानै जीव रतन ॥ 27 ॥ मसीत संवारी माणसाँ, तिसको करैं सलाम । ऐन आप पैदा किया, सो ढाहैं मुसलमान ॥ 28 ॥

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