भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-दया निर्वैरता का अंग 29 निर्वैरी सब जीव सौं, संतजन सोई । दादू एकै आत्मा, बैरी नहिं कोई ॥ 4 ॥ सब हम देख्या शोध कर, दूजा नांही आन । सब घट एकै आत्मा, क्या हिन्दू मुसलमान ॥ 5 ॥ दादू नारी पुरुष का नाम धर, इहि संशय भ्रम भुलान । सब घट एकै आत्मा, क्या हिंदू मुसलमान ॥ 6 ॥ दादू दोनों भाई हाथ पग, दोनों भाई कान । दोनों भाई नैन हैं, हिंदू मुसलमान ॥ 7 ॥ दादू संशय आरसी, देखत दूजा होइ । भ्रम गया दुविधा मिटी, तब दूसर नाहिं कोइ ॥ 8 ॥ किस सौं बैरी ह्वै रह्या, दूजा कोई नांहि । जिसके अंग तैं ऊपजै, सोई है सब मांहि ॥ 9 ॥ सब घट एकै आत्मा, जानै सो नीका । आपा पर में चीन्ह ले, दर्शन है पीव का ॥ 10 ॥ काहे को दुख दीजिये, घट घट आत्माराम । दादू सब संतोषिये, यह साधु का काम ॥ 11 ॥ काहे को दुख दीजिये, साँई है सब मांहि । दादू एकै आत्मा, दूजा कोई नांहि ॥ 12 ॥ साहिब जी की आत्मा, दीजे सुख संतोंष । दादू दूजा को नहीं, चौदह तीनों लोक ॥ 13 ॥ दादू जब प्राण पिछाणै आपको, आत्म सब भाई । सिरजनहारा सबनि का, तासौं ल्यौ लाई ॥ 14 ॥ आत्माराम विचार कर, घट घट देव दयाल । दादू सब संतोषिये, सब जीवों प्रतिपाल ॥ 15 ॥ दादू पूरण ब्रह्म विचारले, द्वैत भाव कर दूर । सब घट साहिब देखिये, राम रह्या भरपूर ॥ 16 ॥

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