भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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पृष्ठ 276

श्री दादूवाणी-सुन्दरी का अंग 30 आतम अंतर आव तूं, या है तेरी ठौर। दादू सुन्दरी पीव तूं, दूजा नांही और ॥ 4 ॥ दादू पीव न देख्या नैन भर, कंठ न लागी धाइ। सूती नहीं गल बाँह दे, बीच हि गई बिलाइ ॥ 5 ॥ सुरति पुकारै सुन्दरी, अगम अगोचर जाइ। दादू विरहनी आत्मा, उठ उठ आतुर धाइ ॥ 6 ॥ साँई कारण सेज सँवारी, सब तैं सुन्दर ठौर। दादू नारी नाह बिन, आण बिठाये और ॥ 7 ॥ कोई अवगुण मन बस्या, चित तैं धरी उतार। दादू पति बिन सुन्दरी, हाँडै घर-घर बार ॥ 8 ॥ अन्य लगन व्यभिचार प्रेम प्रीति सनेह बिन, सब झूठे श्रृंगार। दादू आतम रत नहीं, क्यों मानै भरतार ॥ 9 ॥ दादू हौं सुख सूती नींद भर, जागै मेरा पीव। क्यों कर मेला होइगा, जागै नांही जीव ॥ 10 ॥ सखी न खेलै सुन्दरी, अपने पीव सौं जाग। स्वाद न पाया प्रेम का, रही नहीं उर लाग ॥ 11 ॥ पंच दिहाड़े पीव सौं, मिल काहे न खेले। दादू गहली सुन्दरी, क्यों रहै अकेले ॥ 12 ॥ सखी सुहागिन सब कहैं, हौं री दुहागिन आहि। पिव का महल न पाइये, कहाँ पुकारूँ जाहि ॥ 13 ॥ सखी सुहागिन सब कहैं, कंत न बूझै बात। मनसा वाचा कर्मणा, मूर्च्छ मूर्च्छ जीव जात ॥ 14 ॥ सखी सुहागिन सब कहैं, पीव सौं परस न होइ। निशवासर दुख पाइये, यहु व्यथा न जान कोइ ॥ 15 ॥

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