सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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निंदा का अंग www.dadooram.org अथ निन्दा का अंग ३२ मंगलाचरण दादू नमो नमो निरंजनं, नमस्कार गुरुदेवतः । वन्दनं सर्व साधवा, प्रणामं पारंगत: ॥ 1 ॥ मत्सर ईर्ष्या साधु निर्मल मल नहीं, राम रमै सम भाइ । दादू अवगुण काढ कर, जीव रसातल जाइ ॥ 2 ॥ दादू जब ही साधु सताइये, तब ही ऊँघ पलट। आकाश धँसै, धरती खिसै, तीनों लोक गरक ॥ 3 ॥
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