भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-निगुणा का अंग 33 सतगुरु दिया राम धन, रहै सुबुद्धि बताइ। मनसा वाचा कर्मणा, बिलसै वितड़ै खाइ ॥ 27 ॥ किया कृत मेटै नहीं, गुण ही मांहि समाइ। दादू बधै अनन्त धन, कबहुँ कदे न जाइ ॥ 28 ॥ इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्तियोगनाम तत्वसारमत-सर्वसाधुर्बुद्धिज्ञान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य तैंतीसवां निगुणा का अंग सम्पूर्ण ॥ अंग 33 ॥ साखी 28 ॥

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