सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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विनती का अंग अथ विनती का अंग ३४ मंगलाचरण दादू नमो नमो निरंजनं, नमस्कार गुरुदेवतः । वन्दनं सर्व साधवा, प्रणामं पारंगत: ॥ 1 ॥ करूणा दादू बहुत बुरा किया, तुम्हें न करना रोष। साहिब समाई का धनी, बन्दे को सब दोष ॥ 2 ॥ दादू बुरा बुरा सब हम किया, सो मुख कह्या न जाइ । निर्मल मेरा सांइयाँ, ताको दोष न लाइ ॥ 3 ॥ साँई सेवा चोर मैं, अपराधी बन्दा । दादू दूजा को नहीं, मुझ सरीखा गन्दा ॥ 4 ॥
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