भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 305, कुल 504 में से

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श्री दादूवाणी-राग गौड़ी 1 2. अन्य उपदेश । त्रिताल राम नाम जनि छाड़े कोई, राम कहत जन निर्मल होई ॥ टेक ॥ राम कहत सुख संपति सार, राम नाम तिर लंघे पार ॥ 1 ॥ राम कहत सुधि बुधि मति पाई, राम नाम जनि छाड़हु भाई ॥ 2 ॥ राम कहत जन निर्मल होई, राम नाम कहि कश्मल धोई ॥ 3 ॥ राम कहत को को नहिं तारे, यहु तत दादू प्राण हमारे ॥ 4 ॥ 3. स्मरण उपदेश । राज मृगांक ताल मेरे मन भैया राम कहो रे । राम नाम मोहि सहज सुनावै, उनहीं चरण मन कीन रहो रे ॥ टेक ॥ राम नाम ले संत सुहावै, कोई कहै सब शीश सहो रे । वाही सौं मन जोरे राखो, नीके राशि लिये निबहो रे ॥ 1 ॥ कहत सुनत तेरो कछू न जावै, पापनि छेदन सोई लहो रे । दादू रे जन हरि गुण गावो, कालहि जालहि फेरि दहो रे ॥ 2 ॥ 4. विरह । एकताल कौण विधि पाइये रे, मीत हमारा सोइ ॥ टेक ॥ पास पीव, परदेश है रे, जब लग प्रकटै नांहि। बिन देखे दुख पाइये, यहु सालै मन मांहि ॥ 1 ॥ जब लग नैन न देखिये, प्रकट मिलै न आइ। एक सेज संगहि रहै, यहु दुख सह्या न जाइ ॥ 2 ॥ तब लग नेड़ै दूर है रे, जब लग मिले न मोहि। नैन निकट नहीं देखिये, संग रहे क्या होइ ॥ 3 ॥ कहा करूँ कैसे मिले रे, तलफै मेरा जीव। दादू आतुर विरहनी, कारण अपने पीव ॥ 4 ॥

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