भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-गुरुदेव का अंग 1 सांई सौं साचा रहै, सतगुरु सौं सूरा । साधू सौं सनमुख रहै, सो दादू पूरा ॥ 56 ॥ सतगुरु मिलै तो पाइये, भक्ति मुक्ति भंडार । दादू सहजैं देखिए, साहिब का दीदार ॥ 57 ॥ दादू सांई सतगुरु सेविये, भक्ति मुक्ति फल होइ । अमर अभय पद पाइये, काल न लागै कोइ ॥ 58 ॥ सतगुरु विमुख ज्ञान इक लख चन्दा आण घर, सूरज कोटि मिलाय । दादू गुरु गोविन्द बिन, तो भी तिमिर न जाय ॥ 59 ॥ अनेक चंद उदय करै, असंख्य सूर प्रकास । एक निरंजन नांव बिन, दादू नहीं उजास ॥ 60 ॥ दादू कद यहु आपा जाइगा, कद यहु बिसरै और । कद यह सूक्ष्म होइगा, कद यहु पावै ठौर ॥ 61 ॥ दादू विषम दुहेला जीव को, सतगुरु तैं आसान । जब दरवै तब पाइए, नेड़ा ही अस्थान ॥ 62 ॥ गुरु ज्ञान दादू नैन न देखे नैन को, अन्तर भी कुछ नाहिं । सतगुरु दर्पण कर दिया, अरस परस मिलि माहिं ॥ 63 ॥ घट घट रात रतन है, दादू लखै न कोइ । सतगुरु सब्दौं पाइये, सहजैं ही गम होइ ॥ 64 ॥ जब ही कर दीपक दिया, तब सब सूझन लाग । यों दादू गुरु ज्ञान थैं, राम कहत जन जाग ॥ 65 ॥ आत्मार्थी भेष दादू मन माला तहँ फेरिये, जहाँ दिवस न परसै रात । तहाँ गुरु बाना दिया, सहजैं जपिये तात ॥ 66 ॥

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