सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-गुरुदेव का अंग 1 सरवर भरिया दह दिसा, पंखी प्यासा जाइ । दादू गुरु प्रसाद बिन, क्यों जल पीवै आइ ॥ 45 ॥ सतगुरु बेपरवाही मान सरोवर मांहिं जल, प्यासा पीवै आइ । दादू दोष न दीजिये, घर घर कहण न जाइ ॥ 46 ॥ गुरु लक्षण दादू गुरु गरवा मिल्या, ताथैं सब गमि होइ । लोहा पारस परसतां, सहज समाना सोइ ॥ 47 ॥ दीन गरीबी गहि रह्या, गरवा गुरु गम्भीर । सूक्ष्म शीतल सुरति मति, सहज दया गुरु धीर ॥ 48 ॥ सो धी दाता पलक में, तिरे तिरावण जोग । दादू ऐसा परम गुरु, पाया किहीं संजोग ॥ 49 ॥ दादू सतगुरु ऐसा कीजिये, राम रस माता । पार उतारे पलक में, दर्शन का दाता ॥ 50 ॥ देवै किरका दरद का, टूटा जोड़ै तार । दादू सांधै सुरति को, सो गुरु पीर हमार ॥ 51 ॥ दादू घाइल ह्वै रहे, सतगुरु के मारे । दादू अंग लगाय कर, भौसागर तारे ॥ 52 । दादू साचा गुरु मिल्या, साचा दिया दिखाइ । साचे को साचा मिल्या, साचा रह्या समाइ ॥ 53 ॥ साचा सतगुरु सोधि ले, साचे लीजे साध । साचा साहिब सोधि करि, दादू भक्ति अगाध ॥ 54 ॥ सन्मुख सतगुरु साधु सौं, साईं सौं राता । दादू प्याला प्रेम का, महारस माता ॥ 55 ॥
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