भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-गुरुदेव का अंग 1 साचा समर्थ गुरु मिल्या, तिन तत्त दिया बताइ । दादू मोटा महाबली, घट घृत मथि कर खाइ ॥ 34 ॥ मथि करि दीपक कीजिये, सब घट भया प्रकाश । दादू दीवा हाथि करि, गया निरंजन पास ॥ 35 ॥ परमार्था दीवै दीवा कीजिये, गुरुमुख मार्ग जाइ । दादू अपने पीव का, दर्शन देखै आइ ॥ 36 ॥ दादू दीया है भला, दीया करौ सब कोइ । घर में धन्धा न पाइये, जे कर दीया न होइ ॥ 37 ॥ दादू दीये का गुण तेल है, दीया मोटी बात । दीया जग में चाँदणां, दीया चालै साथ ॥ 38 ॥ सत्य गुरु निर्मल गुरु का ज्ञान गहि, निर्मल भक्ति विचार । निर्मल पाया प्रेम रस, छूटे सकल विकार ॥ 39 ॥ निर्मल तन मन आत्मा, निर्मल मनसा सार । निर्मल प्राणी पंच कर, दादू लंघे पार ॥ 40 ॥ परापरी पासै रहै, कोइ न जाणै ताहि । सतगुरु दिया दिखाइ करि, दादू रह्या ल्यौ लाइ ॥ 41 ॥ शिष्य जिज्ञासा जिन हम सिरजे सो कहाँ, सतगुरु देहु दिखाइ । दादू दिल अरवाह का, तहँ मालिक ल्यौ लाइ ॥ 42 ॥ मुझ ही मैं मेरा धणी, पड़दा खोलि दिखाइ । आत्म सौं परमात्मा, प्रकट आण मिलाइ ॥ 43 ॥ भरि भरि प्याला, प्रेम रस, अपणे हाथ पिलाइ । सतगुरु के सदिकै किया, दादू बलिबलि जाइ ॥ 44 ॥

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