सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग गौड़ी 1
फंध्यो न जानै वन के चाइ, दादू स्वाद बंधानो आइ ॥ ३ ॥ ३३. मन प्रति उपदेस निसारुक ताल काहे रे मन राम विसारै, मनखा जन्म जाय जिय हारै ॥ टेक॥ मात पिता को बन्धन भाई, सब ही सपना कहा सगाई ॥ १ ॥ तन धन जोबन झूठा जाणी, राम हृदय धर सारंग प्राणी ॥ २ ॥ चंचल चितवत झूठी माया, काहे न चेतै सो दिन आया ॥ ३ ॥ दादू तन मन झूठा कहिये, राम चरण गह काहे न रहिये ॥ ४ ॥ ३४. मनुष्य देह महात्म्य । झपताल ऐसा जनम अमोलिक भाई, जामें आइ मिलै राम राई ॥ टेक॥ जामें प्राण प्रेम रस पीवै, सदा सुहाग सेज सुख जीवै ॥ १ ॥ आत्मा आइ राम सौं राती, अखिल अमर धन पावै थाती ॥ २ ॥ प्रकट दर्शन परसन पावै, परम पुरुष मिलि मांहि समावै ॥ ३ ॥ ऐसा जन्म नहीं नर आवै, सो क्यों दादू रतन गँवावै ॥ ४ ॥ ३५. परिचय सत्संग । दीपचन्दी ताल सत्संगति मगन पाइये, गुरु प्रसादैं राम गाइये ॥ टेक॥ आकाश धरणी धरीजे, धरणी आकाश कीजे, शून्य माहिं निरख लीजे ॥ १ ॥ निरख मुक्ताहल मांहैं साइर आयो, अपने पिया हौं ध्यावत खोजत पायौ ॥ २ ॥ सोच साइर अगोचर लहिये, देव देहुरे मांही कवन कहिये ॥ ३ ॥ हरि को हितार्थ ऐसो लखै न कोई, दादू जे पीव पावै अमर होई ॥ ४ ॥ ३६. उपदेश चेतावनी । एकताल कौण जनम कहँ जाता है, अरे भाई, राम छाड़ि कहाँ राता है ॥ टेक॥ मैं मैं मेरी इन सौं लाग, स्वाद पतंग न सूझै आग ॥ १ ॥
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