सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग गौड़ी 1
३९. परिचय वैराग्य । दादरा इनमें क्या लीजे क्या दीजे, जन्म अमोलक छीजे ॥ टेक ॥ सोवत सुपिना होई, जागे थैं नहिं कोई ॥ 1 ॥ मृगतृष्णा जल जैसा, चेत देख जग ऐसा ॥ 2 ॥ बाजी भरम दिखावा, बाजीगर दहकावा ॥ 3 ॥ दादू संगी तेरा, कोई नहीं किस केरा ॥ 4 ॥ ५०. चेतावनी उपदेश । सिंह लील ताल खालिक जागे जियरा सोवे, क्यों कर मेला होवे ॥ टेक ॥ सेज एक नहिं मेला, तातैं प्रेम न खेला ॥ 1 ॥ साँई संग न पावा, सोवत जनम गमावा ॥ 2 ॥ गाफिल नींद न कीजे, आयु घटे तन छीजे ॥ 3 ॥ दादू जीव अयाना, झूठे भरम भुलानां ॥ 4 ॥ अथ राग जंगली गौड़ी ५1. पहरा (पंजाबी भाषा)। कहरवा ताल (बाल्यावस्था) पहले पहरे रैणि दे, बणिजारिया, तूँ आया इहि संसार वे । मायादा रस पीवण लग्गा, बिसाऱ्या सिरजनहार वे । सिरजनहार बिसारा किया पसारा, मात पिता कुल नार वे । झूठी माया आप बँधाया, चेतै नहीं गँवार वे । दादू दास कहै, बणिजारा, तूँ आया इहि संसार वे ॥ 1 ॥ (तरुण अवस्था) दूजे पहरै रैणि दे, बणिजारिया, तूँ रत्ता तरुणी नाल वे । माया मोह फिरै मतवाला, राम न सक्या संभाल वे । राम न संभाले, रत्ता नाले, अंध न सूझै काल वे । हरि नहीं ध्याया, जन्म गँवाया, दह दिशि फूटा ताल वे ।
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