सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग गौड़ी 1 दह दिशि फूटा, नीर निखूटा, लेखा देवण साल वे। दादू दास कहै, बणिजारा, तूँ रत्ता तरुणी नाल वे ॥ 2 ॥ (प्रौढ अवस्था) तीजे पहरे रैणि दे, बणिजारिया, तैं बहुत उठाया भार वे। जो मन भाया, सो कर आया, ना कुछ किया विचार वे। विचार न कीया नाम न लीया, क्यों कर लंघै पार वे। पार न पावे, फिर पछितावे, डूबण लग्गा धार वे। डूबण लग्गा, भेरा भग्गा, हाथ न आया सार वे। दादू दास कहै, बणिजारा, तैं बहुत उठाया भार वे ॥ 3 ॥ वृद्धावस्था जर्जरी भूत (वृद्धावस्था) चौथे पहरे रैणि दे, बणिजारिया, तूँ पक्का हुआ पीर वे। जोबन गया, जरा वियापी, नांही सुधि शरीर वे। सुधि ना पाई, रैणि गँवाई, नैनहुँ आया नीर वे। भव-जल भेरा डूबण लग्गा, कोई न बंधै धीर वे। कोई धीर न बंधे जम के फंधे, क्यों कर लंघे तीर वे। दादू दास कहै, बणिजारा, तूँ पक्का हुआ पीर वे ॥ 4 ॥ ५२. काल चेतावनी राग गौड़ी । पंजाबी त्रिताल काहे रे नर करहु डफाण, अंत काल घर गोर मसाण ॥ टेक ॥ पहले बलवंत गये विलाइ, ब्रह्मा आदि महेश्वर जाइ ॥ 1 ॥ आगैं होते मोटे मीर, गये छाडि पैगम्बर पीर ॥ 2 ॥ काची देह कहा गर्वाना, जे उपज्या सो सबै बिलाना ॥ 3 ॥ दादू अमर उपावनहार, आपहि आप रहै करतार ॥ 4 ॥ ५३. उपदेश पंजाबी । त्रिताल इत घर चोर न मूसै कोई, अंतर है जे जानै सोई ॥ टेक ॥
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