भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग गौड़ी 1 दादू गर्व न कीजिये, सन्मुख सिरजनहार ॥ 4 ॥ 46. हित उपदेश । नट ताल हुसियार रहो, मन मारैगा, साँई सतगुरु तारैगा ॥ टेक ॥ माया का सुख भावै, मूरख मन बौरावै रे ॥ 1 ॥ झूठ साच कर जाना, इन्द्रिय स्वाद भुलाना रे ॥ 2 ॥ दुख को सुख कर मानै, काल झाल नहीं जानै रे ॥ 3 ॥ दादू कह समझावै, यहु अवसर बहुरि न पावै रे ॥ 4 ॥ 47. विश्वास । नटताल साहिबजी सत मेरा रे, लोग झखैं बहुतेरा रे ॥ टेक ॥ जीव जन्म जब पाया, मस्तक लेख लिखाया रे ॥ 1 ॥ घटै बधै कुछ नांही, कर्म लिख्या उस माहीं रे ॥ 2 ॥ विधाता विधि कीन्हा, सिरज सबन को दीन्हा रे ॥ 3 ॥ समरथ सिरजनहारा, सो तेरे निकट गँवारा रे ॥ 4 ॥ सकल लोक फिर आवै, तो दादू दीया पावै रे ॥ 5 ॥ 48. राज विधाधर ताल पूर रह्या परमेश्वर मेरा, अणमांग्या देवै बहुतेरा ॥ टेक ॥ सिरजनहार सहज में देइ, तो काहे धाइ माँग जन लेइ ॥ 1 ॥ विश्वंभर सब जग को पूरै, उदर काज नर काहे झूरै ॥ 2 ॥ पूरक पूरा है गोपाल, सबकी चिंत करै दरहाल ॥ 3 ॥ समर्थ सोई है जगन्नाथ, दादू देख रहे संग साथ ॥ 4 ॥ 49. नाम विश्वास । राज मृगांक ताल राम धन खात न खूटै रे,

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