सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
पृष्ठ 322, कुल 504 में से
संदर्भ में पढ़ेंअपरंपार पार नहिं आवै, आथि न टूटै रे ॥ टेक॥ तस्कर लेइ न पावक जालै, प्रेम न छूटै रे ॥ 1 ॥ चहुंदिशि पसरयो बिन रखवाले, चोर न लूटै रे ॥ 2 ॥ हरि हीरा है राम रसायन, सरस न सूखै रे ॥ 3 ॥ दादू और आथि बहुतेरी, तुस नर कूटै रे ॥ 4 ॥ 50. तत्व उपदेश । राज मृगांक ताल तूँ है तूँ है तूँ है तेरा, मैं नहीं मैं नहीं मैं नहीं मेरा ॥ टेक॥ तूँ है तेरा जगत उपाया, मैं मैं मेरा धंधै लाया ॥ 1 ॥ तूँ है तेरा खेल पसारा, मैं मैं मेरा कहै गँवारा ॥ 2 ॥ तूँ है तेरा सब संसारा, मैं मैं मेरा तिन सिर भारा ॥ 3 ॥ तूँ है तेरा काल न खाइ, मैं मैं मेरा मर मर जाइ ॥ 4 ॥ तूँ है तेरा रह्या समाइ, मैं मैं मेरा गया विलाइ ॥ 5 ॥ तूँ है तेरा तुम्हीं मांहिं, मैं मैं मेरा मैं कुछ नांहिं ॥ 6 ॥ तूँ है तेरा तूँ ही होइ, मैं मैं मेरा मिल्या न कोइ ॥ 7 ॥ तूँ है तेरा लंघे पार, दादू पाया ज्ञान विचार ॥ 8 ॥ 51. संजीवनी । पंचम ताल राम विमुख जग मर मर जाइ, जीवैं संत रहैं लयौ लाइ ॥ टेक॥ लीन भये जे आतम रामा, सदा सजीवन कीये नामा ॥ 1 ॥ अमृत राम रसायन पीया, तातैं अमर कबीरा कीया ॥ 2 ॥ राम राम कह राम समाना, जन रैदास मिले भगवाना ॥ 3 ॥ आदि अंत केते कलि जागे, अमर भये अविनासी लागे ॥ 4 ॥ राम रसायन दादू माते, अविचल भये राम रंग राते ॥ 5 ॥ 52. पंचम ताल निकटि निरंजन लाग रहे, तब हम जीवित मुक्त भये ॥ टेक॥
- 322 -