सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग गौड़ी 1
मर कर मुक्ति जहाँ जग जाइ, तहाँ न मेरा न पतियाइ ॥ 1 ॥ आगे जन्म लहैं अवतारा, तहाँ न मानै मना हमारा ॥ 2 ॥ तन छूटे गति जो पद होइ, मृतक जीव मिले सब कोइ ॥ 3 ॥ जीवित जन्म सुफल करि जाना, दादू राम मिले मन माना ॥ 4 ॥ 53. हैरान प्रश्न। वर्ण भिन्न ताल कादिर कुदरत लखी न जाइ, कहाँ तैं उपजै कहाँ समाइ ॥ टेक ॥ कहाँ तैं कीन्ह पवन अरु पानी, धरणि गगन गति जाइ न जानी ॥ 1 ॥ कहाँ तैं काया प्राण प्रकासा, कहाँ पंच मिल एक निवासा ॥ 2 ॥ कहाँ तैं एक अनेक दिखावा, कहाँ तैं सकल एक ह्वै आवा ॥ 3 ॥ दादू कुदरत बहु हैरानां, कहाँ तैं राख रहे रहमाना ॥ 4 ॥ साखी उत्तर की रहै नियारा सब करै, काहू लिप्त न होइ । आदि अंत भानै घड़ै, ऐसा समर्थ सोइ ॥ 1 ॥ श्रम नहीं सब कुछ करै, यों कल धरी बनाइ । कौतिकहारा ह्वै रह्या, सब कुछ होता जाइ ॥ 2 ॥ दादू शब्दैं बँध्या सब रहै, शब्दैं ही सब जाइ । शब्दैं ही सब ऊपजै, शब्दैं सबै समाइ ॥ 3 ॥ 54. स्वरूप गति हैरान। वर्ण भिन्न ताल ऐसा राम हमारे आवै, वार पार कोई अन्त न पावै ॥ टेक ॥ हलका भारी कह्या न जाइ, मोल माप नहीं रह्या समाइ ॥ 1 ॥ कीमत लेखा नहीं परिमाण, सब पच हारे साधु सुजाण ॥ 2 ॥ आगो पीछो परिमित नांहिं, केते पारिख आवहिं जाहिं ॥ 3 ॥ आदि अन्त मधि कहै न कोइ, दादू देखै अचरज होइ ॥ 4 ॥
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