भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग गौड़ी 1 दादू सबै दिशा सो सारिखा, सबै दिशा मुख बैन। सबै दिशा श्रवणहुँ सुनै, सबै दिशा कर नैन ॥ 1 ॥ सबै दिशा पग शीश हैं, सबै दिशा मन चैन। सबै दिशा सन्मुख रहै, सबै दिशा अंग ऐन ॥ 2 ॥ ॐ सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात। सभूमिं सर्वतः वत्वा अत्र तिष्ठ दशांगुलम् ॥ 57. प्रश्न । पंजाबी त्रिताल अलख देव गुरु ! देहु बताइ, कहाँ रहो त्रिभुवनपति राइ ॥ टेक ॥ धरती गगन बसहु कैलास, तिहूँ लोक में कहाँ निवास ॥ 1 ॥ जल थल पावक पवनां पूर, चंद सूर निकट कै दूर ॥ 2 ॥ मंदिर कौण, कौण घरबार, आसण कौण कहो करतार ॥ 3 ॥ अलख देव ! गति लखी न जाइ, दादू पूछै कहि समझाइ ॥ 4 ॥ उत्तर की साखी दादू मुझ ही मांहीं मैं रहूँ, मैं मेरा घरबार। मुझ ही मांहीं मैं बसूं, आप कहै करतार ॥ 1 ॥ दादू मैं ही मेरा अर्श में,मैं ही मेरा स्थान। मैं ही मेरी ठौर में, आप कहै रहमान ॥ 2 ॥ दादू मैं ही मेरे आसरे, मैं मेरे आधार। मेरे तकिये मैं रहूँ, कहै सिरजनहार ॥ 3 ॥ दादू मैं ही मेरी जाति में, मैं ही मेरा अंग। मैं ही मेरा जीव में, आप कहै प्रसंग ॥ 4 ॥ 58. रस त्रिताल राम रस मीठा रे, कोई पीवै साधु सुजाण। सदा रस पीवै प्रेम सौं, सो अविनाशी प्राण ॥ टेक ॥

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