सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग गौड़ी 1 मगन गलित महारस माता, तूँ है तब लग पीजै । दादू जब लग अंत न आवै, तब लग देखन दीजै ॥ ३ ॥ 76. लांबी (अधीरता अस्थिरता) । दादरा गुरुमुख पाइये रे, ऐसा ज्ञान विचार । समझ समझ समझ्या नहीं, लागा रंग अपार ॥ टेक ॥ जांण जांण जांण्यां नहीं, ऐसी उपजै आइ । बूझ बूझ बूझया नहीं, ढोरी लागा जाइ ॥ 1 ॥ ले ले ले लीया नहीं, हौंस रही मन मांहि । राख राख राख्या नहीं, मैं रस पीया नांहि ॥ 2 ॥ पाय पाय पाया नहीं, तेजैं तेज समाइ । कर कर कछु किया नहीं, आतम अंग लगाइ ॥ 3 ॥ खेल खेल खेल्या नहीं, सन्मुख सिरजनहार । देख देख देख्या नहीं, दादू सेवक सार ॥ 4 ॥ 77. गुरु अधीन ज्ञान । दादरा बाबा ! गुरुमुख ज्ञाना रे, गुरुमुख ध्याना रे ॥ टेक ॥ गुरुमुख दाता गुरुमुख राता, गुरुमुख गवना रे । गुरुमुख भवना, गुरुमुख छवना, गुरुमुख रवना रे ॥ 1 ॥ गुरुमुख पूरा, गुरुमुख शूरा, गुरुमुख वाणी रे । गुरुमुख देणा, गुरुमुख लेणा, गुरुमुख जाणी रे ॥ 2 ॥ गुरुमुख गहबा, गुरुमुख रहबा, गुरुमुख न्यारा रे । गुरुमुख सारा, गुरुमुख तारा, गुरुमुख पारा रे ॥ 3 ॥ गुरुमुख राया, गुरुमुख पाया, गुरुमुख मेला रे । गुरुमुख तेजं, गुरुमुख सेजं, दादू खेला रे ॥ 4 ॥
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