भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 332, कुल 504 में से

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श्री दादूवाणी-राग गौड़ी 1 पोषंतां पहली उठ गरजै, पीछें हाथ न आवै । भूखी भलै दूध नित दूणा, यों या धेनु दुहावै ॥ 1 ॥ ज्यों ज्यों खीण पड़े त्यों दूझै, मुक्ता मेल्यां मारै । घाटा रोक घेर घर आणैं, बांधी कारज सारै ॥ 2 ॥ सहजैं बांधी कदे न छूटै, कर्म बंधन छुट जाई । काटै कर्म सहज सौं बांधै, सहजैं रहै समाई ॥ 3 ॥ छिन छिन मांहि मनोरथ पूरै, दिन दिन होइ अनन्दा । दादू सोई देखतां पावै, कलि अजरावर कंदा ॥ 4 ॥ 74. परिचय । कहरवा जब घट परगट राम मिले । आत्म मंगलाचार चहुँ दिशि, जन्म सुफल कर जीत चले ॥ टेक ॥ भक्ति मुक्ति अभय कर राखे, सकल शिरोमणि आप किये । निर्गुण राम निरंजन आपै, अजरावर उर लाइ लिये ॥ 1 ॥ अपने अंग संग कर राखे, निर्भय नाम निशान बजावा । अविगत नाथ अमर अविनाशी, परम पुरुष निज सो पावा ॥ 2 ॥ सोई बड़भागी सदा सुहागी, परगट प्रीतम संग भये । दादू भाग बड़े वर वर कर, सो अजरावर जीत गये ॥ 3 ॥ 75.पराभक्ति प्रार्थना । कहरवा रमैया ! यहु दुख सालै मोहि । सेज सुहाग न प्रीति प्रेम रस, दर्शन नांहीं तोहि ॥ टेक ॥ अंग प्रसंग एक रस नांही, सदा समीप न पावै । ज्यों रस में रस बहुरि न निकसै, ऐसैं होइ न आवै ॥ 1 ॥ आत्मलीन नहीं निशिवासर, भक्ति अखंडित सेवा । सन्मुख सदा परस्पर नाहीं, तातें दुख मोहि देवा ॥ 2 ॥

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