सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग माली गौड़ 2 अगम अगोचर अपार अपरम्परा, को यहु तेरे चरित न जानैं । ये शोभा तुमको सोहे सुन्दर, बलि बलि जाऊँ दादू न जानैं ॥ ३ ॥ ९३. गुरु ज्ञान। त्रिताल ऐसा रे गुरु ज्ञान लखाया, आवै जाइ सो दृष्टि न आया ॥ टेक॥ मन थिर करूँगा, नाद भरूँगा, राम रमूँगा, रस माता ॥ १ ॥ अधर रहूँगा, करम दहूँगा, एक भजूंगा, भगवंता ॥ २ ॥ अलख लखूँगा, अकथ कथूँगा, एक मथूँगा, गोविन्दा ॥ ३ ॥ अगह गहूँगा, अकह कहूँगा, अलह लहूँगा, खोजन्ता ॥ ४ ॥ अचर चरूंगा, अजर जरूंगा, अतिर तिरूंगा, आनन्दा ॥ ५ ॥ यहु तन तारूं, विषय निवारूं, आप उबारूं, साधन्ता ॥ ६ ॥ आऊँ न जाऊँ, उनमनि लाऊँ, सहज समाऊँ, गुणवंता ॥ ७ ॥ नूर पिछाणूं, तेजहि जाणूं, दादू ज्योतिहि देखन्ता ॥ ८ ॥ ९४. तत्व उपदेश। पंचम ताल बंदे हाजिरां हजूर वे, अल्लह आली नूर वे । आशिकां रा सिदक साबित, तालिबां भरपूर वे ॥ टेक॥ वजूद में मौजूद है, पाक परवरदिगार वे । देख ले दीदार को, गैब गोता मार वे ॥ १ ॥ मौजूद मालिक तख्त खालिक, आशिकां रा ऐन वे । गुदर कर दिल मग्ज भीतर, अजब है यहु सैन वे ॥ २ ॥ अर्श ऊपर आप बैठा, दोस्त दाना यार वे । खोज कर दिल कब्ज कर ले, दरूने दीदार वे ॥ ३ ॥ हुशियार हाजिर चुस्त करदा, मीरां मेहरवान वे । देख ले दर हाल दादू, आप है दीवान वे ॥ ४ ॥
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