सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग माली गौड़ 2 ९०. परिचय । पंचम ताल नीको धन हरि कर मैं जान्यौं, मेरे अखई वोही। आगे पीछे सोई है रे, और न दूजा कोई ॥ टेक॥ कबहूँ न छाडूँ संग पिया को, हरि के दर्शन मोही। भाग हमारे जो हौं पाऊँ, शरणै आयो तोही ॥ 1 ॥ आनन्द भयो सखी जिय मेरे, चरण कमल को जोई। दादू हरि को बावरो, बहुरि वियोग न होई ॥ 2 ॥ ९१. (फारसी) हित उपदेश । पंचम ताल बाबा मर्दे मर्दां गोइ, ये दिल पाक कर्दम धोइ ॥ टेक॥ तर्क दुनियाँ दूर कर दिल, फर्ज फारिग होइ। पैवस्त परवरदिगार सौं, आकिलां सिर सोइ ॥ 1 ॥ मनी मुरदः हिर्स फानी, नफ्स रा पामाल। बदी रा बरतरफ करदः, नाम नेकी ख्याल ॥ 2 ॥ जिंदगानी मुरदः बाशद, कुंजे कादिर कार। तालिबां रा हक, हासिल, पासबाने यार ॥ 3 ॥ मर्दे मर्दां सालिकां सर, आशिकां सुलतान। हजूरी होशियार दादू, इहै गो मैदान ॥ 4 ॥ ९२. ईश्वर चरित । त्रिताल ये सब चरित तुम्हारे मोहना, मोहे सब ब्रह्माण्ड खंडा। मोहे पवन पानी परमेश्वर, सब मुनि मोहे रवि चंदा ॥ टेक॥ साइर सप्त मोहे धरणी धरा, अष्ट कुली पर्वत मेरु मोहे। तीन लोक मोहे जगजीवन, सकल भुवन तेरी सेव सोहे ॥ 1 ॥ शिव बिरंचि नारद मुनि मोहे, मोहे सुर सब सकल देवा। मोहे इन्द्र फणीन्द्र पुनि मोहे, मुनि मोहे तेरी करत सेवा ॥ 2 ॥
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