सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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अथ राग कल्याण ३ (गायन समय संध्या 6 से 9 रात्रि) 96. उपदेश चेतावनी। त्रिताल मन मेरे कछु भी चेत गँवार ! पीछे फिर पछतावेगा रे, आवे न दूजी बार ॥ टेक ॥ काहे रे मन भूल्यो फिरत है, काया सोच विचार। जिन पंथों चलना है तुझ को, सोई पंथ सँवार ॥ 1 ॥ आगै बाट बिषम जो मन रे, जिमि खांडे की धार। दादू दास सांई सौं सूत कर, कूड़े काम निवार ॥ 2 ॥
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