सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
पृष्ठ 345, कुल 504 में से
संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग कान्हड़ा 4 99. वर्ण भिन्न ताल आव सलौने देखन दे रे, बलि बलि जाऊँ बलिहारी तेरे ॥ टेक ॥ आव पिया तूँ सेज हमारी, निसदिन देखूं बाट तुम्हारी ॥ 1 ॥ सब गुण तेरे अवगुण मेरे, पीव हमारी आह न ले रे ॥ 2 ॥ सब गुणवंता साहिब मेरा, लाड़ गहेला दादू केरा ॥ 3 ॥ 100. पंचम ताल आव पियारे मींत हमारे, निशदिन देखूं पाँव तुम्हारे ॥ टेक ॥ सेज हमारी पीव सँवारी, दासी तुम्हारी सो धन वारी ॥ 1 ॥ जे तुझ पाऊँ अंग लगाऊँ, क्यों समझाऊँ वारणें जाऊँ ॥ 2 ॥ पंथ निहारूं बाट सँवारूं, दादू तारूं तन मन वारूं ॥ 3 ॥ 101. (सिंधी) । पंचम ताल आ वे सजणां आव, शिर पर धर पाँव। जानी मैंडा जिन्द असाडे, तूँ रावैंदा राव वे, सजणां आव ॥ टेक ॥ इत्थां उत्थां जित्थां कित्थां, हूँ जीवां तो नाल वे। मीयां मैंडा आव असाडे, तूँ लालों सिर लाल वे, सजणां आव ॥ 1 ॥ तन भी देवाँ, मन भी देवाँ, देवाँ पिंड पराण वे। सच्चा सांई मिल इत्थांईं, जिन्द करां कुरबाण वे, सजणां आव ॥ 2 ॥ तूँ पाकों शिर पाक वे, सजणां, तूँ खूबों शिर खूब। दादू भावे सजणां आवे, तूँ मिट्ठा महबूब वे, सजणां आव ॥ 3 ॥ 102. विनती । राज विद्याधर ताल दयाल अपनै चरणनि मेरा चित्त लगावहु, नीकें ही करी ॥ टेक ॥ नखशिख सुरति सरीर, तूँ नांव रहौं भरी ॥ 1 ॥ मैं अजाण मतिहीण, जम की पाश तैं रहत हूँ डरी ॥ 2 ॥
- 345 -