भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग अडाणा 5 मुख दर्पण मांहि दिखावै, पीव प्रकट आन मिलावै ॥ 2 ॥ सतगुरु साचा धोवै, तो बहुरि न मैला होवै ॥ 3 ॥ तन मन फेरि सँवारै, दादू कर गहि तारै ॥ 4 ॥ 113. गुरुमुख उपदेश (गुजराती) । ललित ताल भाई रे, तेन्हों रूड़ो थाये, जे गुरुमुख मार्ग जाये ॥ टेक॥ कुसंगति परिहरिये, सत्संगति अणसरिये ॥ 1 ॥ काम क्रोध नहिं आणें, वाणी ब्रह्म बखाणें ॥ 2 ॥ बिषिया तैं मन वारै, ते आपणपो तारै ॥ 3 ॥ विष मूकी अमृत लीधो, दादू रूड़ो कीधो ॥ 4 ॥ 114. विनती । पंचम ताल बाबा मन अपराधी मेरा, कह्या न मानै तेरा ॥ टेक ॥ माया मोह मद माता, कनक कामिनी राता ॥ 1 ॥ काम क्रोध अहंकारा, भावै विषय विकारा ॥ 2 ॥ काल मीच नहिं सूझै, आतमराम न बूझै ॥ 3 ॥ समर्थ सिरजनहारा, दादू करै पुकारा ॥ 4 ॥ 115. चेतावनी । पंचम ताल भाई रे यूं विनशै संसारा, काम क्रोध अहंकारा ॥ टेक॥ लोभ मोह मैं मेरा, मद मत्सर बहुतेरा ॥ 1 ॥ आपा पर अभिमाना, केता गर्व गुमाना ॥ 2 ॥ तीन तिमिर नहिं जाहीं, पंचों के गुण माहीं ॥ 3 ॥ आतमराम न जाना, दादू जगत दीवाना ॥ 4 ॥

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