सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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अथ राग अडाणा 5 (गायन समय मध्य रात्रि 12 से 3 बजे) 111. समर्थ गुरु महिमा । त्रिताल भाई रे ऐसा सतगुरु कहिये, भक्ति मुक्ति फल लहिये ॥ टेक ॥ अविचल अमर अविनाशी, अठ सिधि नव निधि दासी ॥ 1 ॥ ऐसा सतगुरु राया, चार पदारथ पाया ॥ 2 ॥ अमी महारस माता, अमर अभय पद दाता ॥ 3 ॥ सतगुरु त्रिभुवन तारे, दादू पार उतारे ॥ 4 ॥ 112. गुरुमुख कसौटी । ललित ताल भाई रे, भानै घड़ै गुरु मेरा, मैं सेवक उस केरा ॥ टेक ॥ कंचन कर ले काया, घड़ घड़ घाट निपाया ॥ 1 ॥
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