सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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श्री दादूवाणी-राग कान्हड़ा 4 110. निस्पृहता । प्रतिताल तो काहे की परवाह हमारे, राते माते नाम तुम्हारे ॥ टेक ॥ झिलमिल झिलमिल तेज तुम्हारा, परगट खेलै प्राण हमारा ॥ 1 ॥ नूर तुम्हारा नैनों मांही, तन मन लागा छूटै नांही ॥ 2 ॥ सुख का सागर वार न पारा, अमी महारस पीवनहारा ॥ 3 ॥ प्रेम मगन मतवाला माता, रंग तुम्हारे दादू राता ॥ 4 ॥ इति राग कान्हड़ा सम्पूर्ण ॥ 4 ॥ पद 13 ॥
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