भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 348, कुल 504 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 348

श्री दादूवाणी-राग कान्हड़ा 4 110. निस्पृहता । प्रतिताल तो काहे की परवाह हमारे, राते माते नाम तुम्हारे ॥ टेक ॥ झिलमिल झिलमिल तेज तुम्हारा, परगट खेलै प्राण हमारा ॥ 1 ॥ नूर तुम्हारा नैनों मांही, तन मन लागा छूटै नांही ॥ 2 ॥ सुख का सागर वार न पारा, अमी महारस पीवनहारा ॥ 3 ॥ प्रेम मगन मतवाला माता, रंग तुम्हारे दादू राता ॥ 4 ॥ इति राग कान्हड़ा सम्पूर्ण ॥ 4 ॥ पद 13 ॥

  • 348 -