भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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राग केदार www.dadooram.org अथ राग केदार 6 (गायन समय संध्या 6 से 9 बजे ) 117. विनती (गुजराती भाषा) । दीप चन्दी ताल मारा नाथ जी, तारो नाम लेवाड़ रे । राम रतन हृदया मा राखे, मारा वाहला जी, विषया थी वारे ॥ टेक ॥ वाहला वाणी ने मन मांहे मारे, चितवन तारो चित राखे । श्रवण नेत्र आ इन्द्री ना गुण, मारा मांहेला मल ते नाखे ॥ 1 ॥ वाहला जीवाड़े तो राम रमाड़े, मनें जीव्यानो फल ये आपे । तारा नाम बिना हौं ज्यां ज्यां बंध्यो, जन दादू ना बंधन कापे ॥ 2 ॥ 118. विरह विनती । उत्सव ताल अरे मेरे सदा के संगाती रे राम! कारण तेरे ॥ टेक ॥

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