भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग केदार 6 कंथा पहरूँ, भस्म लगाऊँ, वैरागिनि ह्वै ढूँढूँ, रे राम ॥ 1 ॥ गिरिवर वासा, रहूँ, उदासा, चढ़ि सिर मेरु पुकारूँ, रे राम ॥ 2 ॥ यहु तन जालूूँ, यहु मन गालूँ, करवत शीश चढ़ाऊँ, रे राम ॥ 3 ॥ शीश उतारूँ, तुम्ह पर वारूँ, दादू बलि बलि जाऊँ, रे राम ॥ 4 ॥ 119. विनती । गजताल अरे मेरा अमर उपावणहार रे खालिक! आशिक तेरा ॥ टेक ॥ तुम सौं राता, तुम सौं माता, तुम सौं लागा रंग, रे खालिक ॥ 1 ॥ तुम सौं खेला, तुम सौं मेला, तुम सौं प्रेम स्नेह, रे खालिक ॥ 2 ॥ तुम सौं लेना, तुम सौं देणा, तुम्हीं सौं रत होइ, रे खालिक ॥ 3 ॥ खालिक मेरा, आशिक तेरा, दादू अनत न जाइ, रे खालिक ॥ 4 ॥ 120. स्तुति । गजताल अरे मेरे समर्थ साहिब रे अल्लह! नूर तुम्हारा ॥ टेक ॥ सब दिशि देवै, सब दिश लेवै, सब दिशि वार न पार, रे अल्लह ॥ 1 ॥ सब दिशि कर्त्ता, सब दिशि हर्त्ता, सब दिशि तारणहार, रे अल्लह ॥ 2 ॥ सब दिशि वक्ता, सब दिशि श्रोता, सब दिशि देखणहार, रे अल्लह ॥ 3 ॥ तूँ है तैसा, कहिये ऐसा, दादू आनन्द होइ, रे अल्लह ॥ 4 ॥ 121. (सिंधी) विरह विलाप । मल्लिका मोद ताल हाल असां जो लालड़े, तो के सब मालूमड़े ॥ टेक ॥ मंझे खामा मंझि बराला, मंझे लागी भाहिड़े । मंझे मेड़ी मुच थईला, कै दरि करियां धाहड़े ॥ 1 ॥ विरह कसाई मुं गरेला, मंझे बढ़े माइहड़े । सीखों करे कवाब जीला, इयें दादू जो ह्याहड़े ॥ 2 ॥

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