भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-गुरुदेव का अंग 1 दादू कहै, सो गुरु किस काम का, गहि भ्रमावै आन। तत्त बतावै निर्मला, सो गुरु साध सुजान ॥ 121 ॥ तूं मेरा, हूं तेरा, गुरु सिष किया मंत। दोनों भूले जात हैं, दादू बिसऱ्या कंत ॥ 122 ॥ दुहि दुहि पीवै ग्वाल गुरु, सिष है छेली गाइ। यह औसर योंही गया, दादू कहि समझाइ ॥ 123 ॥ शिष गोरु, गुरु ग्वाल है, रक्षा कर कर लेइ । दादू राखै जतन कर, आनि धणी को देय ॥ 124 ॥ झूठे अंधे गुरु घणे, भरम दिढ़ावैं आइ। दादू साचा गुरु मिलै, जीव ब्रह्म है जाइ ॥ 125 ॥ झूठे अंधे गुरु घणे, बँधे विषय विकार । दादू साचा गुरु मिल्या, सन्मुख सिरजनहार ॥ 126 ॥ झूठे अंधे गुरु घणे, भरम दिढ़ावैं काम। बँधे माया मोह सौं, दादू मुख सौं राम ॥ 127 ॥ झूठे अँधे गुरु घणे, भटकैं घर घर बार। कारज को सीझै नहीं, दादू माथै मार ॥ 128 ॥ बेखर्च व्यवसनी दादू भक्त कहावैं आपको, भक्ति न जानैं भेव। सुपनै ही समझैं नहीं, कहाँ बसै गुरुदेव ॥ 129 ॥ भ्रम विध्वंस भ्रम कर्म जग बंधिया, पंडित दिया भुलाइ। दादू सतगुरु ना मिले, मारग देइ दिखाइ ॥ 130 ॥ दादू पंथ बतावैं पाप का, भ्रम कर्म विश्वास। निकट निरंजन जे रहै, क्यों न बतावैं तास ॥ 131 ॥

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