भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग रामकली 8 तुम्ह बिन अवर कोई कलि मां नहीं, सुमरतां संत नें साद आपे । कर्म कीधा कोटि छोड़वे बाँधो, नाम लेतां ख्रिणत ही ये कापे ॥ 1 ॥ संत नें सांकड़ो दुष्ट पीड़ा करे, वाहरे वाहलो वेगि आवे । पापनां पुंज पह्वां करी लीधो, भाजिया भै भर्म जोनि न आवे ॥ 2 ॥ साधनें दुहेलो तहाँ तूँ आकुलो, माहरो माहरो करीनें धाए । दुष्ट नें मारिबा संत नें तारिबा, प्रकट थावा तहाँ आप जाए ॥ 3 ॥ नाम लेतां ख्रिण नाथ तें एकले, कोटिनां कर्मनां छेद कीधा । कहै दादू हिवें तुम्ह बिना को नहीं, साखी बोलें जे शरण लीधा ॥ 4 ॥ 180. परिचय विनती राज । विद्याधर ताल हरि नाम देहु निरंजन तेरा, हरि हर्ष जपै जिय मेरा ॥ टेक ॥ भाव भक्ति हेत हरि दीजे, प्रेम उमंग मन आवे । कोमल वचन दीनता दीजे, राम रसायन भावे ॥ 1 ॥ विरह बैराग्य प्रीति मोहि दीजे, हृदय सांच सत भाखूं । चित चरणों चिंतामणि दीजे, अंतर दिढ़ कर राखूं ॥ 2 ॥ सहज संतोष सील सब दीजे, मन निश्चल तुम्ह लागे । चेतन चिंतन सदा निवासी, संग तुम्हारे जागे ॥ 3 ॥ ज्ञान ध्यान मोहन मोहि दीजे, सुरति सदा सँग तेरे । दीन दयाल दादू को दीजे, परम ज्योति घट मेरे ॥ 4 ॥ 181. आशीर्वाद मंगल । झपताल जय जय जय जगदीश तूँ, तूँ समर्थ सांई । सकल भुवन भानैं घड़ै, दूजा को नांहीं ॥ टेक ॥ काल मीच करुणा करै, जम किंकर माया । महा जोध बलवंत बली, भय कंपै राया ॥ 1 ॥ जरा मरण तुम तैं डरै, मन को भय भारी ।

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