भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग आसावरी 9

तूँ ही मेरी जीवनि दादू मांही ॥ 4 ॥ 214. अनन्य शरण । झूमरा तुम्हारे नाम लाग हरि ! जीवन मेरा । मेरे साधन सकल नाम निज तेरा ॥ टेक ॥ दान पुन्य तप तीरथ मेरे, केवल नाम तुम्हारा । यह सब मेरे सेवा पूजा, ऐसा बरत हमारा ॥ 1 ॥ यह सब मेरे वेद पुराणा, सुचि संयम है सोई । ज्ञान ध्यान येही सब मेरे, और न दूजा कोई ॥ 2 ॥ काम क्रोध काया वश करना, ये सब मेरे नामा । मुक्ता गुप्ता परगट कहिये, मेरे केवल रामा ॥ 3 ॥ तारण तिरण नांव निज तेरा, तुमही एक आधारा । दादू अंग एक रस लागा, नांव गहै भव पारा ॥ 4 ॥ 215. चतुस्ताल हरि केवल एक अधारा, सोई तारण तिरण हमारा ॥ टेक ॥ ना मैं पंडित पढ़ि गुणि जानूं , ना कुछ ज्ञान विचारा । ना मैं अगमी ज्योतिग जानूं, ना मुझ रूप सिंगारा ॥ 1 ॥ ना तप मेरे इन्द्रिय निग्रह, ना कुछ तीरथ फिरणां । देवल पूजा मेरे नाहीं, ध्यान कछू नहिं धरणां ॥ 2 ॥ योग युक्ति कछु नाहीं मेरे, ना मैं साधन जानूं । औषधि मूली मेरे नाहीं, ना मैं देश बखानूं ॥ 3 ॥ मैं तो और कछू नाहिं जानूं, कहो और क्या कीजे । दादू एक गलित गोविन्द सौं, इहि विधि प्राण पतीजे ॥ 4 ॥ 216. परिचय चतुस्ताल

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