भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 393, कुल 504 में से

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श्री दादूवाणी-राग आसावरी 9 पीव घर आवनो ए, अहो ! मोहि भावनो ते ॥ टेक ॥ मोहन नीको री हरी, देखूंगी अँखियाँ भरी । राखूं हौं उर धरी प्रीति करी खरी, मोहन मेरो री माई । रहूँ हौं चरणौं धाई, आनन्द बधाई, हरि के गुण गाई ॥ 1 ॥ दादू रे चरण गहिये, जाइने तिहाँतो रहिये । तन मन सुख लहिये, विनती गहिये ॥ 2 ॥ 217. त्रिताल हाँ माई ! मेरो राम बैरागी, तजि जनि जाइ ॥ टेक ॥ राम विनोद करत उर अंतर, मिलिहौं बैरागिनि धाइ ॥ 1 ॥ जोगिन ह्रै कर फिरूँगी विदेसा, राम नाम ल्यौ लाइ ॥ 2 ॥ दादू को स्वामी है रे उदासी, रहिहौं नैन दोइ लाइ ॥ 3 ॥ 218. उपदेश चेतावनी । राज मृगांक ताल रे मन ! गोविन्द गाइ रे गाइ, जन्म अविरथा जाइ रे जाइ ॥ टेक ॥ ऐसा जनम न बारम्बारा, तातैं जप ले राम पियारा ॥ 1 ॥ यहु तन ऐसा बहुरि न पावै, तातैं गोविन्द काहे न गावै ॥ 2 ॥ बहुरि न पावै मानुष देही, तातैं कर ले राम सनेही ॥ 3 ॥ अब के दादू किया निहाला, गाइ निरंजन दीनदयाला ॥ 4 ॥ 219. काल चेतावनी । राज मृगांक ताल मन रे ! सोवत रैन बिहानी, तैं अजहूँ जात न जानी ॥ टेक ॥ बीती रैन बहुरि नहीं आवे, जीव जाग जनि सोवे । चारों दिशा चोर घर लागे, जाग देख क्या होवे ॥ 1 ॥ भोर भयो पछतावन लागे, मांहीं महल कुछ नांहीं । जब जाइ काल काया कर लागे,तब सोधे घर मांहीं ॥ 2 ॥

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