भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग आसावरी 9 जाग जतन कर राखो सोई, तब तन तत्त न जाई । चेतन पहरे चेतत नांहीं, कहि दादू समझाई ॥ ३ ॥ २२०. राज विद्याधर ताल देखत ही दिन आइ गये, पलट केश सब श्वेत भये ॥ टेक ॥ आई जुरा मीच अरु मरणा, आया काल अबै क्या करणा । श्रवणों सुरति गई नैन न सूझै, सुधि बुधि नाठी कह्या न बूझै ॥ १ ॥ मुख तैं शब्द विकल भई वाणी, जन्म गया सब रैन बिहाणी । प्राण पुरुष पछतावण लागा, दादू अवसर काहे न जागा ॥ २ ॥ २२१. उपदेश । राज विद्याधर ताल हरि बिन हां, हो कहूँ सचु नांहीं, देखत जाई विषय फल खाहीं ॥ टेक ॥ रस रसना के मीन मन भीरा, जल तैं जाइ यों दहै शरीरा ॥ १ ॥ गज के ज्ञान मगन मद माता, अंकुँए डोरि गहै फँद गाता ॥ २ ॥ मर्कट मूठी मांहिं मन लागा, दुख की राशि भ्रमै भ्रम भागा ॥ ३ ॥ दादू देखु हरि सुखदाता, ताको छाड़ि कहाँ मन राता ॥ ४ ॥ २२२. उदीक्षण ताल सांई बिना संतोष न पावै, भावै घर तजि वन वन धावै ॥ टेक ॥ भावै पढ़ि गुनि वेद उचारै, आगम निगम सबै विचारै ॥ १ ॥ भावै नव खंड सब फिर आवै, अजहूँ आगै काहे न जावै ॥ २ ॥ भावै सब तजि रहै अकेला, भाई बन्धु न काहू मेला ॥ ३ ॥ दादू देखै सांई सोई, साच बिना संतोष न होई ॥ ४ ॥ २२३. मनोपदेश चेतावनी । उदीक्षण ताल मन माया रातो भूले । मेरी मेरी कर कर बौरे, कहा मुग्ध नर फूले ॥ टेक ॥

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