भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग आसावरी 9 माया कारण मूल गँवावै, समझ देख मन मेरा। अंत काल जब आइ पहूँता, कोई नहीं तब तेरा ॥ 1 ॥ मेरी मेरी कर नर जाणै, मन मेरी कर रहिया। तब यहु मेरी काम न आवै, प्राण पुरुष जब गहिया ॥ 2 ॥ राव रंक सब राजा राणा, सबहिन को बोरावै। छत्रपति भूपति तिन के संग, चलती बेर न आवै ॥ 3 ॥ चेत विचार जान जिय अपने, माया संग न जाई। दादू हरि भज समझ सयाना, रहो राम ल्यौ लाई ॥ 4 ॥ 224. काल चेतावनी । ललित ताल रहसी एक उपावनहारा, और चलसी सब संसारा ॥ टेक ॥ चलसी गगन धरणि सब चलसी, चलसी पवन अरु पानी। चलसी चंद सूर पुनि चलसी, चलसी सबै उपानी ॥ 1 ॥ चलसी दिवस रैण भी चलसी, चलसी जुग जम वारा। चलसी काल व्याल पुनि चलसी, चलसी सबै पसारा ॥ 2 ॥ चलसी स्वर्ग नरक भी चलसी, चलसी भूचणहारा। चलसी सुख दुःख भी चलसी, चलसी कर्म विचारा ॥ 3 ॥ चलसी चंचल निहचल रहसी, चलसी जे कुछ कीन्हा। दादू देख रहै अविनाशी, और सबै घट खीना ॥ 4 ॥ 225. त्रिताल इहि कलि हम मरणे को आये, मरण मीत उन संग पठाये ॥ टेक ॥ जब तैं यहु हम मरण विचारा, तब तैं आगम पंथ सँवारा ॥ 1 ॥ मरण देख हम गर्व न कीन्हा, मरण पठाये सो हम लीन्हा ॥ 2 ॥ मरणा मीठा लागे मोहि, इहि मरणे मीठा सुख होहि ॥ 3 ॥ मरणे पहली मरे जो कोई, दादू सो अजरावर होई ॥ 4 ॥

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