भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग आसावरी 9 सींगी मुद्रा विभूति न कंथा, जटा जाप आसन नहिं पंथा ॥ 2 ॥ तीरथ व्रत न वनखंड वासा, मांग न खाइ नहीं जग आसा ॥ 3 ॥ अमर गुरु अविनाशी जोगी, दादू चेला महारस भोगी ॥ 4 ॥ 230. उपदेश । भंग ताल जोगिया बैरागी बाबा, रहै अकेला उनमनि लागा ॥ टेक ॥ आतम जोगी धीरज कंथा, निश्चल आसण आगम पंथा ॥ 1 ॥ सहजैं मुद्रा अलख अधारी, अनहद सींगी रहणि हमारी ॥ 2 ॥ काया वन-खंड पांचों चेला, ज्ञान गुफा में रहै अकेला ॥ 3 ॥ दादू दर्शन कारण जागे, निरंजन नगरी भिक्षा मांगे ॥ 4 ॥ 231. समता ज्ञान । ललित ताल बाबा, कहु दूजा क्यों कहिये, तातैं इहि संशय दुख सहिये ॥ टेक ॥ यहु मति ऐसी पशुवां जैसी, काहे चेतत नांहीं । अपना अंग आप नहिं जानै, देखै दर्पण मांही ॥ 1 ॥ इहि मति मीच मरण के तांई, कूप सिंह तहँ आया । डूब मुवा मन मरम न जाना, देखि आपनी छाया ॥ 2 ॥ मद के माते समझत नांहीं, मैगल की मति आई । आपै आप आप दुख दीया, देखी आपनी झांई ॥ 3 ॥ मन समझे तो दूजा नांहीं, बिन समझे दुख पावै । दादू ज्ञान गुरु का नांहीं, समझ कहाँ तैं आवै ॥ 4 ॥ 232. ललित ताल बाबा, नांहीं दूजा कोई । एक अनेक नाम तुम्हारे, मोपै और न होई ॥ टेक ॥ अलख इलाही एक तूँ, तूँ ही राम रहीम ।

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