भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग आसावरी 9 तूँ ही मालिक मोहना, केशव नाम करीम ॥ 1 ॥ सांई सिरजनहार तूँ, तूँ पावन तूँ पाक। तूँ कायम करतार तूँ, तूँ हरि हाजिर आप ॥ 2 ॥ रमता राजिक एक तूँ, तूँ सारंग सुबहान । कादिर करता एक तूँ, तूँ साहिब सुलतान ॥ 3 ॥ अविगत अल्लह एक तूँ, गनी गुसांई एक। अजब अनुपम आप है, दादू नाम अनेक ॥ 4 ॥ 233. समर्थाई । रंग ताल जीवत मारे मुये जिलाये, बोलत गूंगे गूंग बुलाये ॥ टेक ॥ जागत निशि भर सोई सुलाये, सोवत रैनि सोई जगाये ॥ 1 ॥ सूझत नैनहुँ लोइन लीये, अंध विचारे ता मुख दीये ॥ 2 ॥ चलते भारी ते बिठलाये, अपंग विचारे सोई चलाये ॥ 3 ॥ ऐसा अद्भुत हम कुछ पाया, दादू सतगुरु कहि समझाया ॥ 4 ॥ 234. प्रश्न । रंग ताल क्यों कर यह जग रच्यो, गुसांई ? तेरे कौन विनोद बन्यो मन मांहीं ? टेक ॥ कै तुम आपा प्रकट करना, कै यहु रचले जीव उधरना ॥ 1 ॥ कै यहु तुम को सेवक जानैं, कै यहु रचले मन के मानैं ॥ 2 ॥ कै यहु तुम को सेवक भावै, कै यहु रचले खेल दिखावै ॥ 3 ॥ कै यहु तुम को खेल पियारा, कै यहु भावै कीन्ह पसारा ॥ 4 ॥ यहु सब दादू अकथ कहानी, कहि समझावो सारंग-पाणी ॥ 5 ॥ उत्तर की साखी दादू परमारथ को सब किया, आप स्वारथ नांहिं । (15-50) परमेश्वर परमारथी, कै साधू कलि मांहिं ॥ 1 ॥

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