भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

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श्री दादूवाणी-राग सिन्दूरा 10 दीपक दृष्टि पतंग ज्यों, यों भ्रमि जले जनि कोई रे ॥ 1 ॥ जिह्वा स्वारथ आपने, ज्यूं मीन मरे तज नीरो रे। मांहैं जाल न जाणियो, तातैं उपनों दुःख शरीरो रे ॥ 2 ॥ स्वादैं ही संकट पर्यो देखत ही नर अंधो रे। मूरख मूठी छाड़ि दे, होइ रह्यो निर्बंधो रे ॥ 3 ॥ मान सिखावणि माहरी, तू हरि भज मूल न हारी रे। सुख सागर सोई सेविये, जन दादू राम सँभारी रे ॥ 4 ॥ इति राग सिन्दूरा सम्पूर्ण ॥ 10 ॥ पद 8 ॥

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