भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

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राग सारंग अथ राग सारंग 15 (गायन समय मध्य दिन) 264. गुरु ज्ञान सूर । फख्ता ताल हो ऐसा ज्ञान ध्यान, गुरु बिना क्यों पावै । वार पार, पार वार, दुस्तर तिर आवै हो ।। टेक ।। भवन गवन, गवन भवन, मन ही मन लावै । रवन छवन, छवन रवन, सतगुरु समझावै हो ।। 1 ।। क्षीर नीर, नीर क्षीर, प्रेम भक्ति भावै । प्राण कँवल विकस विकस, गोविन्द गुण गावै हो ।। 2 ।। ज्योति जुगति बाट घाट, लै समाधि ध्यावै । परम नूर परम तेज, दादू दिखलावै हो ।। 3 ।।

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