भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग टोडी(तोडी) 16 एकही एकै आपहि आप, एकही एकै माइ न बाप ॥ 5 ॥ एकही एकै सहज स्वरूप, एकही एकै भये अनूप ॥ 6 ॥ एकही एकै अनत न जाइ, एकही एकै रह्या समाइ ॥ 7 ॥ एकही एकै भये लै लीन, एकही एकै दादू दीन ॥ 8 ॥ 286. विनती । वसंत ताल आदि है आदि अनादि मेरा, संसार सागर भक्ति भेरा । आदि है अंत है, अंत है आदि है, बिड़द तेरा ॥ टेक ॥ काल है झाल है, झाल है काल है, राखिले राखिले प्राण घेरा । जीव का जन्म का, जन्म का जीव का, आपही आपले भांन झेरा ॥ 1 ॥ मर्म का कर्म का, कर्म का मर्म का, आइबा जाइबा मेट फेरा । तार ले पार ले, पार ले तार ले, जीव सौं शिव है निकट नेरा ॥ 2 ॥ आत्मा राम है, राम है आत्मा, ज्योति है युक्ति सौं करो मेला । तेज है सेज है, सेज है तेज है, एक रस दादू खेल खेला ॥ 3 ॥ 287. परिचय । कोकिल ताल सुन्दर राम राया । परम ज्ञान परम ध्यान, परम प्राण आया ॥ टेक ॥ अकल सकल अति अनूप, छाया नहिं माया । निराकार निराधार, वार पार न पाया ॥ 1 ॥ गंभीर धीर निधि शरीर, निर्गुण निरकारा । अखिल अमर परम पुरुष, निर्मल निज सारा ॥ 2 ॥ परम नूर परम तेज, परम ज्योति प्रकाशा । परम पुंज परापरं, दादू निज दासा ॥ 3 ॥

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