भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग टोडी(तोडी) 16 282. भेष बिडंबन । ललित ताल हम पाया, हम पाया रे भाई । भेष बनाय ऐसी मन आई ॥ टेक ॥ भीतर का यहु भेद न जानै, कहै सुहागिनी क्यों मन मानै ॥ 1 ॥ अंतर पीव सौं परिचय नाँहीं, भई सुहागिनी लोगन मांहीं ॥ 2 ॥ सांई स्वप्नै कबहुँ न आवै, कहबा ऐसे महल बुलावै ॥ 3 ॥ इन बातन मोहि अचरज आवै, पटम किये कैसे पीव पावै ॥ 4 ॥ दादू सुहागिनी ऐसे कोई, आपा मेट राम रत होई ॥ 5 ॥ 283. आत्म समता । उत्सव ताल ऐसे बाबा राम रमीजे, आतम सौं अंतर नहीं कीजे ॥ टेक ॥ जैसे आतम आपा लेखै, जीव जंतु ऐसे कर पेखै ॥ 1 ॥ एक राम ऐसे कर जानै, आपा पर अंतर नहिं आनै ॥ 2 ॥ सब घट आतम एक विचारे, राम सनेही प्राण हमारे ॥ 3 ॥ दादू साची राम सगाई, ऐसा भाव हमारे भाई ॥ 4 ॥ 284. नाम समता । उत्सव ताल माधइयो-माधइयो मीठो री माइ, माहवो-माहवो भेटियो आइ ॥ टेक ॥ कान्हइयो-कान्हइयो करता जाइ, केशवो केशवो केशवो धाइ ॥ 1 ॥ भूधरो भूधरो भूधरो भाइ, रमैयो रमैयो रह्यो समाइ ॥ 2 ॥ नरहरि नरहरि नरहरि राइ, गोविन्दो गोविन्दो दादू गाइ ॥ 3 ॥ 285. समता । बसंत ताल एकही एकै भया आनंद, एकही एकै भागे द्वन्द ॥ टेक ॥ एकही एकै एक समान, एकही एकै पद निर्वान ॥ 1 ॥ एकही एकै त्रिभुवन सार, एकही एकै अगम अपार ॥ 2 ॥ एकही एकै निर्भय होइ, एकही एकै काल न कोइ ॥ 3 ॥ एकही एकै घट प्रकास, एकही एकै निरंजन वास ॥ 4 ॥

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