भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-राग टोडी(तोडी) 16 279. त्रिताल काहे रे बक मूल गँवावै, राम के नाम भलें सचु पावै ॥ टेक ॥ वाद विवाद न कीजे लोई, वाद विवाद न हरि रस होई । मैं मैं तेरी मांनै नाँहीं, मैं तैं मेट मिलै हरि मांहीं ॥ 1 ॥ हार जीत सौं हरि रस जाई, समझि देख मेरे मन भाई! मूल न छाड़ी दादू बौरै, जनि भूलै तूँ बकबे औरै ॥ 2 ॥ २४०. (फारसी) त्रिताल हुशियार हाकिम न्याव है, सांई के दीवान। कुल का हिसाब होगा, समझ मुसलमान ॥ टेक ॥ नीयत नेकी सालिकां, रास्ता ईमान। इखलास अंदर आपणे, रखणां सुबहान ॥ 1 ॥ हुक्म हाजिर होइ बाबा, मुसल्लम महरबान। अक्ल सेती आपमां, शोध लेहु सुजान ॥ 2 ॥ हक सौं हजूरी हूँणां, देखणां कर ज्ञान। दोस्त दाना दीन का, मनणां फरमान ॥ 3 ॥ गुस्सा हैवानी दूर कर, छाड़ दे अभिमान। दुई दरोगां नांहिं खुशियाँ, दादू लेहु पिछान ॥ 4 ॥ २४1. साधु प्रति उपदेश (गुजराती) । ललित ताल निर्पख रहणा, राम राम कहणा, काम क्रोध में देह न दहणा ॥ टेक ॥ जेणें मारग संसार जाइला, तेणें प्राणी आप बहाइला ॥ 1 ॥ जे जे करणी जगत करीला, सो करणी संत दूर धरीला ॥ 2 ॥ जेणें पंथैं लोक राता, तेणें पंथैं साधु न जाता ॥ 3 ॥ राम नाम दादू ऐसें कहिये, राम रमत रामहि मिल रहिये ॥ 4 ॥

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