भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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दादू द्वारे दीन पुकारे, काहे न दर्शन लहिये ॥ 3 ॥ 276. उपदेश चेतावनी । मकरंद ताल कुछ चेति रे कहि क्या आया । इन में बैठा फूल कर, तैं देखी माया ॥ टेक ॥ तूँ जनि जानैं तन धन मेरा, मूरख देख भुलाया । आज काल चल जावै देही, ऐसी सुन्दर काया ॥ 1 ॥ राम नाम निज लीजिये, मैं कहि समझाया । दादू हरि की सेवा कीजे, सुन्दर साज मिलाया ॥ 2 ॥ 277. मकरंद ताल नेटि रे माटी में मिलना, मोड़ मोड़ देह काहे को चलना ॥ टेक ॥ काहे को अपना मन डुलावै, यहु तन अपना नीका धरना । कोटि वर्ष तूँ काहे न जीवै, विचार देख आगै है मरना ॥ 1 ॥ काहे न अपनी बाट सँवारै, संजम रहना, सुमिरण करणा । गहिला ! दादू गर्व न कीजे, यहु संसार पँच दिन भरणा ॥ 2 ॥ 278. ब्रह्मयोग ताल जाइ रे तन जाइ रे । जन्म सुफल कर लेहु राम रमि, सुमिर सुमिर गुण गाइ रे ॥ टेक ॥ नर नारायण सकल शिरोमणि, जनम अमोलक आइ रे । सो तन जाइ जगत नहिं जानै, सकै तो ठाहर लाइ रे ॥ 1 ॥ जरा काल दिन जाइ गरासै, तासौं कुछ न बसाइ रे । छिन छिन छीजत जाइ मुग्ध नर, अंत काल दिन आइ रे ॥ 2 ॥ प्रेम भगति, साधु की संगति, नाम निरंतर गाइ रे । जे सिर भाग तो सौंज सुफल कर, दादू विलम्ब न लाइ रे ॥ 3 ॥

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